
नियम-परंपराओं को रौंद कर अपने सांसद कोष का पैसा क्षेत्र में कर रहे खर्च
संवाददाता/रणजीत कुमार/जहानाबाद। केंद्र सरकार ने सभी सांसद को अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए हर साल पांच करोड़ रूपये खर्च करने का अधिकार दे रखा है। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत सांसदों को पैसा मिलता है। लेकिन बिहार के एक सांसद ने इस योजना का पैसा अपने संसदीय क्षेत्र के बजाय दूसरे क्षेत्र में खर्च
करने की अनुशंसा कर दी है। राजद के सांसद ने ये कारनामा किया है, जिसकी जानकारी सामने आने के बाद उनके संसदीय क्षेत्र के लोग दंग रह गये हैं।
अपनी सांसद निधि का पैसा दूसरे क्षेत्र में खर्च करने का कारनामा जहानाबाद से आरजेडी के सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने कर दिखाया है। सुरेंद्र यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार से मिले पैसे को गया संसदीय क्षेत्र में खर्च करने की अनुशंसा कर दी है। उनकी अनुशंसा के बाद गया जिला प्रशासन ने काम शुरू करा दिया है। गया के जिला। योजना पदाधिकारी ने कुल 28 विकास योजनाओं की सूची जारी की है, जिसके लिए सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने अपने सांसद कोष से पैसा खर्च की अनुशंसा की है। ये सारी योजनायें गया जिले के बेलागंज औऱ नगर प्रखंड की हैं। सवाल ये उठता है कि सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने अपने सांसद कोष का पैसा गया जिले में खर्च करने की अनुशंसा क्यों की। स्थानीय लोगों के मुताबिक सांसद ने ये सारी कवायद विधानसभा चुनाव में अपने बेटे को सेट कराने के लिए की है। सुरेंद्र प्रसाद यादव अपने बेटे को किसी हाल में बेलागंज से विधायक बनाना चाहते हैं, इसलिए संसदीय नियम-परंपराओं को रौंद कर अपने सांसद कोष का पैसा दूसरे क्षेत्र में खर्च कर रहे हैं।
दरअसल सुरेंद्र प्रसाद यादव सांसद बनने से पहले बेलागंज के विधायक हुआ करते थे। उनके सांसद बनने से बेलागंज सीट पर उपचुनाव हुआ तो आरजेडी ने सुरेंद्र यादव के बेटे विश्वनाथ कुमार सिंह को मैदान में उतारा था। लेकिन विश्वनाथ कुमार सिंह को करारी हार का सामना करना पड़ा था। 2024 में हुए उपचुनाव में बेटे की जबरदस्त हार के बाद सुरेंद्र प्रसाद यादव लगातार बेलागंज में कैंप कर रहे हैं। सुरेंद्र यादव इस दफे हर हाल में अपने बेटे को विधायक बनाना चाहते हैं। इसके लिए वे सारे हथकंडे अपना रहे हैं। सुरेंद्र प्रसाद यादव का दावा है कि पिछली दफे वे हद से ज्यादा आत्मविश्वास में रह गये थे, इसलिए बेटे की हार हो गयी। लेकिन इस दफे वे हर हाल में अपने बेटे को जीत दिलाकर रहेंगे।
